Talaya

On the brightest day of a summer noon
Talaya, the noble one was born
Destined for greatness, she left her home
Mounted on a cloud and rose above

Up in skies, amidst the shadow
lying upon a bed of soft snow
Tired and weary, she fell asleep
In the lullaby of whispering breeze

There she rested for weeks in a row
Dreaming about those lake town folks
Until the day, she was awaken
By the sound of granny’s grinding stones

With a heavy heart she stood upright
knowing it was time to leave
Led by her father, lord of thunder
She followed quietly in his lead

They traveled the long winding road
Riding in the chariots of gold
Across mountains and rivers blue
Made just in time before the month of June

What she saw saddened her deep
Because standing there to welcome her fleet
With eyes full of agony and dearth
Waited patiently the children of earth

Crowned in shiny beads of sweat
With robes made of tattered threads
Standing beneath the scorching sky
They prayed with their voices dry

Her heart wept and melted at the sight
And yet she tried hard, with all her might
She whimpered, she sobbed like a child
and cried until middle of the night

Her tears became drops and drops became rain
came down from the skies roaring again
The people laughed in joy and swayed
And sang merrily to her saving grace

Next morning Talaya opened her eyes
And what she saw, she couldn’t believe
Where there was misery yesterday
Now stood a world full of green

And among them she found mother earth
Verdant in her glory, flowers in her hair
Talaya finally smiled to herself
For she realized this was to be her fate

So it’s here she stays, for days and weeks
Showering happiness, sharing her bliss
We surrender to her will and write her songs
As the legend of the noble one goes on

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बात इतनी सी है

तुम ख़्वाबोंमें आना छोड दो

हम रातोंको जागना छोड़ देंगे

उल्फतमे अपनी हमे यूँ जलाना छोड दो

हम बारिशोंमें घरसे निकलना छोड़ देंगे 😊

अफसाना

किस इकरार का इंतज़ार कर रहे हो नवाज,

उन्होंने लब्जों को अपने शबनमी लबों में दबाये रखा है।

बात कहाँसे होगी उनसे हमारी, बातोंको तो भी उन्होंने

औरोंकी हर एक बात पर उलझाये रखा है।।

हम से मोहोब्बत उनकी सरे आम हो न जाये शायद,

उन्होंने आंखों को पलकोंकी चिलमन में छुपाये रखा है।

एहसास जताए कोई उन्हें भी हमारी बेसब्री का,

हमने उनकी हर एक अदा पर अफसाना बनाये रखा है।।

ठिकाना

इक रूमानी सुबह का साथ निभाने हम चले

बिस्तरपर लेटी रात का हात हटाकर हम चले

वैसे किसीका दिल दुखाना हमारी आदत तो नही

पर एक मक़ाम पर अर्सा बीताना भी तो अपनी फ़ितरत नही

बहता पानी हूँ जैसे, सुखनेसे पहले सौ मोड़ मूड़ जाऊँ

दर दर का फकीर हूँ खुदा से पहले उसके बंदो से जुड़ जाऊँ

कभी अपने तो कभी औरोंकी धुन रमाता हूँ

में पत्ता डाल से बिछड़ा मस्त हवा संग गुनगुनाता हूँ 

एहसास

मैं वो ख़याल हूँ
जो आपको दूसरोंसे अलग बनता है
हर किसी के जहनमें  बसा हूँ फिरभी
समझ नहीं आता बस महसूस होता हूँ
कभी दोस्ती, कभी प्यार, कभी चाहत तो कभी गिला
कभी जिम्मेदारी तो कभी बस बेख़ौफ़ जवानी का गुरूर
कभी कुछ पानेकी आस, कभी सब लुटा देने की चाह
कभी जीतनेका जूनून कभी बस मर मिटने का खुमार
आसमाँ को बरसनेपे मजबूर करदे मैं वही प्यास हूँ
सोच जो मुकद्दर जिंदगी बनादे मैं वही एहसास हूँ

लब पे छुपा इक राज हूँ मैं
धड़कन की परवाज हूँ मैं
धूप में भी और कहर में भी
रातमें भी और सहर में भी
रोज नई आगाज़ हूँ मैं
ग़ैर नही कुछ ख़ास हूँ मैं
दूर..

जश्नमे भी और सोग में भी
प्रीतमें भी और दर्द में भी
हर पल की फ़रियाद हूँ मैं
शोर नहीं बस एक साज हूँ मेँ
दूर..

अभ्र भी में और घटाभी में भी
शख्स भी मैं, आवामभी मेँ
हारभी मेँ और जीत में भी
हर लम्हा तेरे साथ हूँ मेँ

दूर नहीं तेरे पास हूँ मैं
ख्वाब नहीं एहसास हूँ मैं

आख़री सजा

यूं न जला अपनी उल्फतमे ए साकी,
बिनबातोंकी सोहबतका न मतलब है बाकी
तुटे दिलोको पनाह न दे,चाहे दर्द दे तनहाई का
पर मेरे इश्कको बेबजह नाम न दे बेवफाई का..

भुलादे वो कस्मे, वो वादे चंद वफाके,
छूडाले हमसे ये, दामन तेरे इश्क़का
उस चाहतकी, उस हसरतकी
इस आशिकीकी हर शक्सियत मिटादे
तुझसे दिल लगाने की एक आख़री सजा दे..

इकरारका जवाब इन्कारही सही
प्यारके बदले प्यार ना सही
प्यास बुझाने भरदे जहरही कोई,
पैमाना वो बस अपने हाथोंसे पिलादे
तुझसे दिल लगाने की एक आख़री सजा दे

जन्नत नसीब हो अब या दोजाखही कोई,
या नियामत हो जमीका एक कतरा पाक कही,
तह्झीबसे एक मुट्ठी जमींसेही मिलादे
जीनेकी उम्मीद नही, बस मौतका हौसला दे
तुझसे दिल लगाने की एक आख़री सजा दे

आशियाना

बादलों के उस पार अपना एक जहाँ बनाने
उड चले हम एक आशियाना बनाने
तुफानों से लडने लहरों पर उछलने,
चल दिये हम अपने मुकद्दर से मिलने
साहिल को छोड मौजों से रिशता बनाने
उड चले हम एक आशियाना बनाने

रोका हमे इस दरने, इन दीवारों ने,
उलझाया किसीकी सहमी निगाहोंने,
माना ना ये दिल और ना चले बहाने
उड चले हम एक आशियाना बनाने
अनजानी हैं राहें सभी,अजनबी मंजर हैं
खुदा जब हाकिम है मेरा, ना किसी आँधी का डर
आवारगी को अपनी दासताँ बनाने
उड चले हम एक आशियाना बनाने

Farewell Li’l one

There lived a girl, who never said no
Came riding on clouds and left with a roar
Her zeal made of fire, her will made of steel
A King wasn’t born before whom she would kneel

There lived a girl, her face like a clown
Devil himself couldn’t make her frown
Her smile, her pranks and the way her voice ring
Nascent like first showers, was the joy it would bring

There lived a girl, flower in the wild
Care in her vanity, Humble in her pride
She moved from one flower to other, like a butterfly
Bouncing off pollen, tasting nectar and spreading out joy

There lived a girl, moon in her full glory
Every moment in her life a never ending story
Like a shooting star that only stays long enough to make a wish
In a blink of an eye she touched our lives and vanished

There lives a girl, her stories be told for long
She rides in our hearts and breaths in our songs

तेरे बीना

कटती जाये उमरीया,बालम तेरी यादमें,
बीता जाये जोबन पर आस ना जाये..
अखियों का सावन गालों पे बरसे,
भीगी जाये रैन पर प्यास ना जाये..
भुला चुके तुम वो ज़माने मोहोब्बत के
मुझसे तो भुलाई एक बात ना जाये..
चैनो सुकूनसे गुजरे सदियाँ जब तुम्हारी,
तनहाई मे मुझसे कटी एक रात ना जाये..
रूके रहे कदम आजभी तेरे दरपे,
ढल जाये दिन पर,अब वो शाम ना आये..
सिमटती जाये दिलमें, धड़कने दिनबादिन
होटों से फिरभी तेरा नाम ना जाये..

कुछ शेर

कल रात जो देखा आपको छ्तपर तारे गिनते हुए
लगा के हम आजतक चांद पत्थरको समझ रहे थे
और जब देखा दिनमे आपको सजदेमे सर झुकाए
लगा के फ़िज़ूल ही हम एहतराम काबे का कर थे
एक नजर जब वो झाकते है घर छोड़ने से पहले
फिर मुड़कर चले जाते है दिनभर न आने के लिए
कुछ खनकनेकी आवाज हमें हर बार सुनायी देती है
और लोग कहते है नवाज आइनों के दिल नहीं होते
आज आईना भी देखकर बड़ा खुश हो रहा है ‘नवाज’
कहता है मेरे हमशक्लसे कभी उसकी मुलाक़ात हुई थी
नही जानते के उनसे हमारा
किस जनम का रिशता है नवाज
बिन कहे भी सब कुछ कह जाते है हम
और वो बिन सुने ही सब समज जाते है
वह तो अपनी दो आंखोसेही सब कह जाते है नवाज
मेरी मानलो तो अब ये शेरोशायरी का पेशा छोड ही दो
हमने बहोत देखे है दुनिया के सलीके ‘नवाज’
पैसों की गिनती भी तो थूक लगाकर करते है ये लोग
उनसे भले ही तुम्हे गम-आझी मिली हो,
तुम्हे तो फिर भी दिलोंपे अपना दस्तखत छोड जाना है
जिंदगी एक खुबसुरत गजल है ‘नवाज’
और तुम्हे आखरी मक्ते में अपना तक्ख्ल्लुस छोड जाना है
उल्फत की जंग में जख्म-ए-दिलों की हिसाबदारी मत रख ‘नवाज’
मोह्ब्बत के होने-न होने का फैसलाही तो पंखुड़ियाँ तोड़कर किया जाता है
लोग कहते है एक आग का दरिया ये, तू बस याद रख जहनमे इतनाही
जलेगा तो जुगनू कहलाएगा, मिटेगा तो मजनू कहलाएगा
गैरों की मय्यतोंमे जी भर के चीखले “नवाज”,
जब निकलेगा तेरा जनाजा, कहाँ मौका मिलेगा
आती है लहरें, जाती है लहरें, साहिल की तरह सहना सीखले
आती है हवाएँ, जाती है हवाएँ, कश्ती की तरह बहना सीखले
कहर बरसायेगा बवंडर जब, बाँजकी तरह लड़ना सीखले
छूट जायंगे साथी कभी न कभी, जिंदगी तू बढ़ते रहना सीखले
कभी रात थी काली चादरकी तरह लपेटली,
कभी कडवी सच्चाई थी दवा समझकर गटकली
जब खुशी बनके आयी जिंदगी हमने खैरातमे लुटायी,
और जब तनहाईमे दर्द बनके आयी हमने होठोंसे लगायी

ढूंड रहा हूं एक शायर की खोयी हुई मौसिकी को
दुनिया की भगदड़में बिछडी हुई शायरी को
रोटी कपडे के चक्करमे पीछे छुटी जिन्दादिली को
जज्बातों की कशमकश में सहमी हुई जिंदगी को..

नजरे मिलाकर नजरे झुकानेकी आदत तो आपने आजभी बदली नही
फिर दिल लगाकर दिल जलानेका इल्झाम हमे किस हैसियत से दे रहे हो?

बड़े दिनो के बाद आसमानसे रसकी पुहार हुई है आज,
शायद इसीलिए के आपकी नज़रे हमसे चार हुई है आज
एक अरसे के बाद पलकों से चादर नींदकी उठी है आज,
न जाने क्यूँ फिर दिनमे ख्वाब देखने की तमन्ना मचल उठी है आज

हम इंतजार है करते इस दरपे बैठे तेरी पायल की झनकार का,
के मुलाकात से ज्यादा खुशी इस दिलको तेरी आहटोंसे होती है

जिंदगी मे और भी गम है मोहोब्बत के सिवा
पर जिंदगी तेरी बस एक भरम है मोहोब्बत के सिवा
रहमोकरम तो बहूत है इस रस्म-ए-उल्फत के सिवा
पर क्या हसी सितम है कोई इस निगाहे करम के सिवा

अब क्यों भीगे रुख्सारोंको सफेद रुमाल के पीछे छुपा रहे हो
कत्ल ही करना था तो कम से कम खंजर पर अपना नाम लिखा होता

हर दिन निकलता है उनकी उल्फत का नजारा लेकर
के हर रात निकलती है उनके न होने का एहसास लेकर
और फिरभी पूछते है ये जालीम दुनियावाले
के क्यूं हम दुनिया के डूबने का इंतजार इतनी बेसबरीसे कर रहे है

अपने दिल को रोज टूटते हुए देखा है हमने आपकी हर मुस्कान पर
और फिर आपकी वही मुस्कराहट इसे धडकनेका सबब देती है
मिलता नही तो बस जवाब इक सवाल का के इस मासूम जान का क्या करे
जो आपके इश्क़मे इस तरह उलझी है के निकलती ही नहीं

शमा के हर मुस्कान पे जलजाए हम वो परवाने है
छलके जो साकीके लरजते हातोंसे हम वो महकश पैमाने है
टूट जायेतो तो खनक ना हो शीशेका वह दिल रखते है
लूट जाए मोहोब्बतमे तो अफ़सोस ना हो इश्क़ मे बस इतना उसूल रखते है

चल चले वहाँ जहाँ समंदरों के साहिल न हो
उम्र की सीमा न हो, न हो रिश्तों की सरहदें
चल चले वहां जहाँ रवायतों की दहलीज न हो
और जहाँ प्यार का नाम प्यार हो जंजीर न हो

बादल गरजके चल दिए,
सावन बरस के चल दिया
पतझड़ ही रहा मेरे दिलका मौसम फिरभी,
यह चाँद जैसे फुला नहीं के फिर सिमट गया

गैरों की मय्यतोंमे जी भर के चीखले ‘नवाज’,
जब निकलेगा तेरा जनाजा, कहाँ मौका मिलेगा
मक़बरे संगेमरवारके बनानेवाले तो बहौत मिलेंगे आपको
पर अगर जूनून है फना होनेका तो हमारे पास आईयेगा

 

यकीन

चाहे काटे लाख बिछाये,
मखमलीके परदे लगाये,
जब जब खिलकर हसेगी कली
भंवरे तो झूम उठेंगे ना

तुम जानकर अंजान बनो चाहे,
हम तो जान लुटायेंगे ना

लबों को बंद रखलो तुम चाहे
लब्ज तो फिरभी कहेंगे ना
बदले मौसम, बदले दुनिया
हम तो तुम्हारे रहेंगे ना

छुके निकलेगी कोई ठंडी हवाकी लहर,
चराग-ए-दिल फिर जल पडेंगे ना